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सामाजिक परिवेश

Posted On: 29 Apr, 2012 Others में

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आज चारो ओर से येही प्रशन सुनने को मिलता है समाज में सामंजस्य नहीं है परन्तु इसका उतर्दायितव कोई भी लेने को तत्पर नहीं है सदाचार की चर्चा चारो और है पर समय परनिभाया नहीं जाता है पहले पाश्चत्य सभ्यता ने हमारी वेश भूषा को प्रभावित किया फिर हमारी खानपान को अब हमारी सोच को बदल दिया जिस कारण यह प्रशन है इसका समाधान नहीं मिल पा रहा है

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAHUL YADAV के द्वारा
April 29, 2012

मंजू जी , ये बात सही है कि आज समाज में सामंजस्य की कमी दिखाई दे रहीं है पर इसके जिम्मेदार भी तो हम ही हैं और हमको ही इसका समाधान भी निकालना है। हर अंधेरे के बाद उजाला जरूर होता है इसी तरह हमारे समाज के कई ऐसे लोंग हैं जो इस कार्य के लिए प्रयासरत हैं। काई भी बदलाव एकाएक नहीं हो जाता। क्योंकि इस प्रकार का प्रयास करने वालों की संख्या कम होती है। ऐसे लोगों को हम-आपको पहचानना होगा और उनका साथ देना होगा तभी इस बदलाव की रफ्तार को बल मिलेगा। सार्थक विषय का चयन करने के लिए आपका धन्यवाद


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