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तकदीर

Posted On: 3 Jul, 2012 Others में

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तकदीर कहाँ से मिलती है मैंने एक दिन भगवन से पूछा भगवन बोले नहीं चुप रहे
तब एस से पूछा उस से पूछा कोई बोला नहीं बस यही की यह मिलती नहीं लेनी परती है
तब एक दिन मन से पूछा मन बोला मैं तेरे मन में ही बसती हूँ
केर लो मन को पक्का कर्मो को सच्चा तो तभी साथ चलती हूँ
उस दिन से केर लिया मन को पक्का कर्मो को सच्चा

थाम लिया नेक नीयत और सच्चे कर्मो का हाथ
तब सब ने पूछा यह कहाँ से मिली
मैंने बताया रोज रात को सपने में आती है
वही फिर तदबीर में बदल जाती है
मन ने बोला कह दे सब से सच्चे कर्मो से मिलती है
मन बोला अभिमान न केर जुक केर चल निभ केर चल
तभी यह सदा साथ चलती है

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
July 10, 2012

बहुत सुन्दर भाव युक्त रचना.

Mohinder Kumar के द्वारा
July 5, 2012

मंजू जी, “One sure think about LUCK is that it will change one day” इसलिये भरोसा रखिये और आगे बढिये… कहते हैं जब आदमी सोता है तो तकदीर सोती है, जब बैठता है तो तकदीर बैठती है और जब चल पडता है तो तकदीर मंजिल बन कर उसके कदम चूमती है. भाव भरी रचना के लिये बधाई


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