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आत्म चिंतन

Posted On: 27 Aug, 2012 Others में

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यह मत सोचो की तुम क्या नहीं रखते हो
यह सोचो जो है उसे कैसे बचाकर रख सकते हो
यह मत सोचो की तुमने क्या खोया
यह सोचो जो खोया उसे कैसे पाओगे
यह मत सोचो कोई कैसे बिछड़ा
यह सोचो उसे कैसे अपने पास लाओ
यह मत सोचो तुम क्या नहीं हो
यह सोचो जो पाना चाहते हो उसे कैसे पाओगे
यह मत सोचो लोग क्या कहते हैं तुम्हारे बारे में
यह सोचो जो हो उसमे कैसे अपने को अति उतम बनाओ
यह मत सोचो की कल का दिन बीत गया अब क्या होगा
यह सोचो की जो आने वाला कल है उसे कैसे सुंदर बनाएं
यह मत सोचो की कैसे सब छुट गया
यह सोचो जो है उसे कैसे बचाएं हम
यह मत सोचो की गलती कैसे हो गयी
यह सोचो की आगे न हो जो सही हुआ उस पर अभिमान न करो
यह मत सोचो जीवन में दर्दबहुत मिलें हैं
यह सोचो उन दर्दों की दवा क्या है वह दवा सब को बताओ
यह मत सोचोजीवन भर सब कुछ सह रहे हो
यह जो जीवन में आराम है उसे भी सबको बताओ
खुद को हर समय चिनन में घेरो
यह सोचो दूसरों के चिंतन को कैसे दूर करें

मेरे ब्लॉग पर सभी स्वरचित रचनाएँ हैं

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 8, 2012

मंजू जी, बेहतरीन प्रस्तुति…

    manjusharma के द्वारा
    September 8, 2012

    निर्भय जी एक अंतराल बाद ही सही पर आपको मेरा आत्म चिंतन पसंद आया धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
August 28, 2012

मंजू जी, बहुत ही सुन्दर एवं  व्यवहारिक संदेश की काव्यात्क प्रस्तुति….बधाई…

nishamittal के द्वारा
August 27, 2012

बहुत सुन्दर सकारात्मक सन्देश जीवनोपयोगी

    manjusharma के द्वारा
    August 27, 2012

    nishaa ji thanks alot u always app.i am highly thank ful to u

vikramjitsingh के द्वारा
August 27, 2012

आद्र्निय्या मंजू जी…..सादर….. सार्थक और साकारात्मक विचार……. धन्यवाद…..

    manjusharma के द्वारा
    August 27, 2012

    Respected Dinesh Ji Thanks for the ciomplements Manju Sharma


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